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    अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग द्वारा संचालित योजनाएँ
    • आवासीय विद्यालय
      अनुसूचित जातियों के छात्र/छात्राओं के लिए 65 एवं अनुसूचित जन जातियों के छात्रों के लिये 15 आवासीय विद्यालय संचालित है जिनमें क्रमश: 23640 अनुसूचित जाति के छात्र/छात्राओं एवं 4880 अनुसूचित जनजाति के छात्रों की शिक्षा की व्यवस्था है।
      आवासीय विद्यालयो के छात्र/छात्राओं को दैनिक आवश्यकता यथा भोजन, वस्त्र, दवा इत्यादि तथा विद्यालय के रखरखाव हेतु राज्य सरकार द्वारा राशि उपलब्ध करायी जाती है। वर्तमान में छात्र/छात्राओं को दी जा रही दैनिक आवश्यकता का दर निम्न प्रकार है:-
      क्रमांक दैनिक आवश्यकता का मद दर
      (राशि रु0 में)
      वर्ग 1-5 वर्ग 6-12
      1
      भोजन 900/- प्रति माह 1200/- प्रति माह
      2
      वस्त्र 1500/- वार्षिक 1875/- वार्षिक
      3
      तेल, साबुन, सोडा 100/- प्रति माह 100/- प्रति माह
      4
      दवा 100/- प्रति माह 100/- प्रति माह
    • छात्रवृत्ति
      • महाविद्यालयों में छात्रवृत्ति- महाविद्यालयों में पढ़ने वाले अनुसूचित जातियों, अनूसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के छात्र/छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान करने की योजना गैर योजना, योजना तथा केन्द्र प्रायोजित योजना के तहत् संचालित है। इस योजना के तहत् सरकार के नियमों के तहत् मान्यताप्राप्त महाविद्यालय/विश्वविद्यालय/ संस्थान में अध्यनरत छात्र/छात्रा को केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित नियमों एवं दरों के अनुरूप छात्रवृत्ति दिये जाने का प्रावधान है। इस योजना के तहत् सम्बंधित दिशा-निदेश केन्द्र सरकार के वेबसाईट http://Socialjustice.nic.in पर देखा जा सकता है।

      • विद्यालय छात्रवृत्ति
        राज्य के सरकारी विद्यालयों में वर्ग - 1 से 10 तक में अघ्यनरत अनुसूचितजाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्र/छात्राओं को विद्यालय छात्रवृति प्रदान किया जाता है। दिवाकालीन वर्ग-1 से 4 तक प्रति माह 50/- रू0, वर्ग-5 से 6 तक प्रतिमाह 100/- रू0 एवं वर्ग 7 से 10 तक प्रतिमाह 150/- रू0 के दर से छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है। वर्ग-1 से 10 तक छात्रावासी छात्र/छात्रा को प्रतिमाह 250/- के दर से छात्रवृत्ति दिये जाने का प्रावधान है।

    • प्रावैधिकी छात्रवृत्ति -इस योजना के तहत् अनु0जाति एवं अनु0जनजाति के वैसे छात्र/छात्रा जो राज्य सरकार द्वारा मान्यताप्राप्त संस्थानों में टाईपिंग/ आशुलिपि/ कम्पयुटर का प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं उन्हें प्रत्येक माह 500/- रू0 के दर से दिये जाने का प्रावधान है।

    • मुख्यमन्त्री अनु0 जाति एवं अनु0 जनजाति मेधा वृत्ति योजना :-अनु0 जाति एवं अनु0 जनजाति के वैसे छात्र/छात्रा जो बिहार विधालय समिति से दसवीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीण होंगे, उन्हें मुख्यमन्त्री अनु0 जाति एवं अनु0 जनजाति मेधा वृत्ति योजना के तहत् 10000.00 रू0 देने की योजना 2008-09 से प्रारंभ की गई है। वर्ष 2008-09 में 4532 अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्र/छात्राओं के लिए राशि स्वीकृत की गई है।

    • अस्वच्छ कार्यो में लगे व्यक्तियों के बच्चों को प्री-मैट्रिक छात्रवृति- यह केन्द्र प्रायोजित योजना एवं गैर योजना दोनों मदों से संचालित है। केन्द्र प्रायोजित योजना के अन्तर्गत 100 प्रतिशत राशि (दिनांक-1/4/2008 से) भारत सरकार द्वारा वहन किया जाता है। इस योजना का उदेश्य शौचालय की सफाई करने वालों,चर्मशोधन करने वालों,चमडा उधाड़ने वालों तथा सफाई कार्य से परम्परागत रूप से जुडे़ सफाई कर्मचारियों के बच्चों को मैट्रीक पूर्व शिक्षार्जन हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करना है।

    • मुशहर एवं भुईंया जाति के बच्चों को छात्रवृति- अनु0जाति एवं अनु0 जनजाति कल्याण विभाग द्वारा मुसहर जाति के लोगों में शिक्षा के प्रसार हेतु विशेष कार्यक्रम 1992-93 से शुरू किया गया है। इनके बच्चे विद्यालयों में शिक्षा ग्रहण करने जांय, इसके लिये विशेष प्रोत्साहन का भी प्रयास किया गया है जिसके अन्तर्गत मुसहर जाति के छात्र/छात्राओं को विद्यालय जाने पर 1 रूपये प्रति उपस्थिति दिवस (100/- प्रतिमाह) वर्ग 1 से 6 के लिये प्रावधान किया गया है ताकि वे छात्र/छात्राएं इससे प्रोत्साहित होकर विद्यालय जायं और बीच में ही वे विद्यालय न छोड़ें । वर्ष 2009-10 से भूंइयां जाति को भी इस योजना में सम्मिलित किया गया है।

    • स्पोर्टस छात्रवृति की योजना- अनु0जाति एवं अनु0जनजाति के लड़के-लड़कियॉ खेल-कूद में काफी रुचि लेते है, लेकिन समुचित व्वयस्था एवं समुचित प्रोत्साहन के अभाव में उन्हें खेल-कुद प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर नहों मिल पाता है। इस योजना के तहत् बच्चों को विशेष प्रशिक्षण दिये जाने का प्रावधान है।
  • पुस्तक अधिकोष
    मेडिकल एवं इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढने वाले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जन-जातियों के छात्रों के लिये राज्य के मेडिकल कॉलेजों, इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलीटेकनिक, पशु चिकित्सा महाविद्यालयों, कृषि महाविद्यालयों, प्राक परीक्षा प्रशिक्षण केन्द्रों में पुस्तक अधिकोष की स्थापना की गई है। इन अधिकोषों के माघ्यम से दो छात्रों पर एक सेट कोर्स की पुस्तके उपलब्ध करायी जाती है।
  • छात्रावास योजना
    अनु0जाति एवं अनु0 जनजाति कल्याण विभाग द्वारा अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के छात्र/छात्राओं के लिये छात्रावास संचालित हैं। इन छात्रावासों में रहने वाले छात्रों को उपस्कर, रसोइया सह सेवक की सेवायें, रोशनी, बर्तन इत्यादि सुविधायें सरकारी खर्च पर उपलब्ध कराई जाती है। प्रत्येक छात्रावास में एक छात्रावास अधीक्षक भी होते हैं जिन्हें सरकार द्वारा मानदेय के रुप में अधीक्षण भत्ता दिया जाता है और जिन पर छात्रावास के सुसंचालन का उत्तरदायित्व रहता है।
  • प्राक् परीक्षा प्रशिक्षण केन्द्र
    - अनुसूचित जाति के छात्रों को संघ लोक सेवा आयोग एंव बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में सफल होने के लिये उन्हें प्रशिक्षण देने हेतु पटना,भागलपुर एंव दरभंगा विश्वविद्यालयों के तत्वावधान में एक-एक प्राक् परीक्षा प्रशिक्षण केन्द्र की स्थापना की गई है। इसके अतिरिक्त अनु0जनजाति के लिए कटिहार में भी केन्द्र स्थापित किये गये है। इन केन्द्रों में प्रशिक्षण पाने वाले छात्रों को 125/- रू0 से 700/- रू0 तक प्रति माह की दर से छात्रवृत्ति स्वीकृति का प्रावधान है। प्री-मेडिकल एंव प्री-इंजीनियरिंग एडमीशन टेस्ट के लिये भी तैयारी के लिये प्रशिक्षण के कार्यक्रम का प्रावधान है । बिहार लोक सेवा आयोग सहायक ग्रेड, आशुलिपिक, लिपिक ग्रेड, अंकेक्षण लेखा निरीक्षक, आयकर निरीक्षक आदि की परीक्षा में सफलीभूत होने के लिये प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • आयुर्वेदिक चिकित्सालय
    इस विभाग के अन्तर्गत अनु0जनजाति के लिए 10 आयुर्वेदिक चिकित्सालय स्वीकृत है। प्रत्येक चिकित्सालय में एक वैद्य तथा एक वैद्य सहायक का प्रावधान है। इनमें से 4 केन्द्रों में 5-5 अन्त: वासी रोगियों की चिकित्सा का प्रावधान है।
  • व्यवसायिक प्रशिक्षण -अनु0 जाति के व्यक्तियों को विभिन्न व्यवसाय में प्रशिक्षण देकर रोजगार देने हेतु यह योजना प्रारंभ की गई है। इस योजना के तहत रोजगार उन्मुखी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये जायेंगे।
  • मेरिट उन्नयन योजना (के0प्रा0यो0)-इस योजना के तहत् केन्द्र सरकार द्वारा अनु0जाति के वर्ग 9 से 12 कक्षा के छात्र/छात्रा को विशेष कोचिंग उपलब्ध कराने हेतु राशि उपलब्ध कराई जाती है। इस योजना के तहत् प्रति लाभुक 15,000/- रू0 व्यय करने का प्रावधान है।
  • शोध कार्य-राज्य अनु0जनजातियों पर उनके आर्थिक, सामाजिक, सास्कृतिक विषयों पर शोध करने हेतु यह योजना प्रारंभ की गई है। इस योजना के तहत् शोध कार्य किये जाने से उनके उत्थान हेतु विशेष ध्यान दिया जा सकेगा।
  • सेमीनार-विभागीय योजनाओं के कार्यान्वयन एवं इसमें उत्पन्न कठिनाईयों के निराकरण हेतु यह आवश्यक है कि विभागीय क्षेत्रीय पदाधिकारियों एवं अन्य क्षेत्र के व्यक्तियों के साथ गोष्ठि/सेमिनार का आयोजना किया जाये। साथही विभिन्न प्रकार के सूचना तन्त्र के माध्यम यथा लीफलेट,होर्डिग के माध्यम से योजनाओं के सम्बंध में सूचना लाभूको को दी जाये। इन कार्यों के लिए यह योजना ली गई है।
  • वैधिक सहायता-अनुसूचित जतियों को अन्तरित जमीन की वापसी,दीवानी,फौजदारी एवं राजस्व सम्बंधी मुकदमे लड़ने हेतु आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। उसी प्रकार दीवानी,फैाजदारी तथा राजस्व मूकदमों में फंसे अनुसूचित जाति के सदस्यों को भी गैर-अनुसूचित जाति के सदस्य से मुकदमा लड़ने हेतु वैधिक सहायता प्रदान की जाती है।
  • अनुसूचित जाति उप-योजना के तहत् विशेष केन्द्रीय सहायता -अनुसूचित जाति के व्यक्तियों के आर्थिक उत्थान हेतु केन्द्र सरकार द्वारा प्रति वर्ष विशेष केन्द्रीय सहायता मद में राशि विमुक्त की जाती है। इसके साथ-साथ राज्य सरकार द्वारा राज्य योजना से 5 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान प्रदान किया जाता है।
  • थारू अनु0जनजाति विकास-बिहार में थारू जाति को अनुसूचित जनजाति में वर्ष 2003 में सम्मिलित किया गया है। इस थारू जनजाति के विकास के लिए विशेष रूप से मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है। वर्ष 2008-09 में ग्यारहवीं पंचवर्षीय योजना के लिए कुल 125 करोड़ रू0 की योजना की स्वीकृति दी गई है। इसके तहत् मुख्य रूप से पश्चिम चम्पारण जिला के अनुसूचित जनजाति के लिए 5 बालक एवं 5 बालिका आवासीय उच्च विद्यालय स्थापना की स्वीकृति दी गई है। इसके साथ-साथ समेकित थरूहट विकास अभिकरण की स्थापना पश्चिम चम्पारण (बेतिया) जिला में की गई है ।
  • अनुसूचित जाति उप योजना-राज्य योजना/केन्द्रीय योजना के प्रत्येक प्रक्षेत्र हेतु जो भी भौतिक लक्ष्य निधारित है, उसका एक निर्धारित अंश से अनुसूचित जाति के सदस्यों को लाभ पहुंचाया जाता है और उसे अलग किये गये अंश का उपभोग मात्र अनुसूचित जाति के सदस्यों के कल्याण पर ही किया जाता है।इसके लिये सामान्य विकास प्रक्षेत्रों में ऐसे ही योजनाओं का चयन किया जाता है, जो अनुसूचित जातियों के लिए लाभकारी हो। विशेष अंगीभूत योजना का लक्ष्य अनुसूचित जातियों के परिवारों को हर दृष्टि से कुशल एवं दक्ष बनाना है, ताकि उनकी आय में वृद्वि हो के और वे गरीबी रेखा से उपर उठ सके। विशेष अंगीभुत योजना के कार्यान्वयन हेतु राज्य के विकास के विभिन्न विभागों द्वारा राशि कर्णाकित की जाती है और उनके द्वारा ही अनुसूचित जाति के परिवारों को लाभ पहुंचाने के उदद्श्य से विशेष अंगीभूत योजना का कार्यान्वयन किया जाता है।
  • अनुसूचित जनजाति उप योजना- राज्य योजना/केन्द्रीय योजना के प्रत्येक प्रक्षेत्र हेतु जो भी भौतिक लक्ष्य निधारित है, उसका एक निर्धारित अंश जो अनु0जनजाति के जनसंख्या के प्रतिशत के अनुसार अनुसूचित जनजाति उप योजना के लिए कर्णांकित किया जाता है।
  • परीक्षा शुल्क की प्रतिपूर्ति-अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्र/छात्रा को विद्यालय परीक्षा समिति की वार्षिक परीक्षा के लिये परीक्षा शुल्क की प्रतिपूर्ति अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग द्वारा की जाती है।
  • e Z Pay Card-
    प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति के अंतर्गत मैट्रिक के उपर के सभी कक्षाओं में अध्ययनरत छात्र/छात्राओं को छात्रवृत्ति दी जाती है । इस योजना के अंतर्गत अनुरक्षण भत्ता के साथ-साथ सभी अनिवार्य शुल्कों भुगतान किया जाता है । वर्तमान प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति हेतु अनु0 जाति एवं अनु0 जनजाति के अभिभावक का अधिकतम वार्षिक आय 2.00 लाख है ।
    राज्य योजना के अंतर्गत बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा संचालित मैट्रिक के परीक्षा में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण होनेवाले अनु0 जाति एवं अनु0 जनजाति छात्रों को मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति मेधावृत्ति योजना के तहत 10,000 रु0 एकमुश्त राशि वृत्तिका के रुप में प्रदान की जा रही है ।
    वर्तमान व्यवस्था
    प्रवेशिकोत्तर छात्रवृत्ति एवं मुख्यमंत्री मेधावृत्ति योजना के तहत छात्र/छात्राओं को छात्रवृत्ति एवं मेधावृत्ति भुगतान वर्तमान में चेक/ड्राफ्ट के माध्यम से किया जाता है इस प्रक्रिया में विलम्ब होने की संभावना बनी रहती है एवं छात्र/छात्राओं को इस छात्रवृत्ति का भुगतान समय पर किये जाने में कठिनाई होती है । छात्र/छात्राओं को समय पर छात्रवृत्ति की राशि नही मिलने से उनमें असंतोष बनी रहती है । छात्र/छात्राओं को सुविधापूर्ण तरीके से तथा समय में छात्रवृति भुगतान के दृष्टिगत e Z Pay Card के माध्यम से छात्रवृति का भुगतान करने का योजना प्रारम्भ किया जा चुका है।
    e Z Pay Card की विशेषता –
    • बैंक में खाता खोलने की आवश्यकता नहीं
    • प्रत्येक छात्र/छात्रा के लिए e Z Pay Card
    • कार्ड पर छात्र/छात्रा का नाम अंकित
    • जिला स्तरीय मुख्य शाखा से कार्ड का वितरण
    • राशि की सुरक्षा
    • बचत का उत्तम माध्यम
    • त्वरित भुगतान
    • 10 वर्ष की वैधता
    • समय की बचत
    • डाक शुल्क का बचत
    • कार्यालयों के पत्राचार से मुक्ति
    इस कार्ड के माध्यम से प्रवेशिकोत्तर वर्ग के छात्र/छात्रा को प्रथम चरण में तथा द्वितीय चरण में मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति मेधावृति योजना तथा मुख्यमंत्री अत्यन्त पिछडा़ वर्ग मेधावृति योजना के छात्र/छात्रा को भी आच्छादित किया जाएगा। कालान्तर में यह कार्ड वर्ग – VII से X के करीब 8 लाख बच्चों को भी कराने पर विचार किया जायेगा।

  • मासिक प्रतिवेदन e Z Pay Card


  • Land Less Garden/Kitchen Garden Scheme
    लैंडलेस गार्डेन/किचेन गार्डेन योजना अनु0 जाति एवं अनु0 जनजाति कल्याण विभाग की एक महव्वपूर्ण योजना है, जिसे अनुसूचित जाति के परिवारों के लिए प्रायोगिक तौर पर कार्यान्वयन किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य दैनिक सब्जी की आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ बाजार में बेचने योग्य सब्जियों का उत्पादन।
    इस योजना के अंतर्गत वैसे परिवारों का चयन किया जाना है, जिनके पास खेती योग्य जमीन उपलब्ध नहीं है या बहुत ही कम है। इस योजना के अंतर्गत वैसे सब्जियों का उत्पादन किया जाना है, जो पारम्परिक सब्जियों के रूप में प्रयोग की जाती है साथ-ही-साथ वैसी सब्जियों के भी उत्पादन का प्रस्ताव है, जो आधुनिक एवं फायदे वाली है, जैसे - ब्रोंकली, लैट्यूष, मशरूम, बेबीकॉर्न, स्वीट कॉर्न इत्यादि। आर्गेनिक खेती को बढ़ावा दिया जाना है एवं घर के आस-पास भूमि पर ही अधिक उत्पाद करवाना है। इस योजना के अंतर्गत 3 गैर सरकारी संस्थाओं का चयन किया गया है। इन संस्थाओं के माध्यम से 10 जिलों के 20 प्रखंड में कार्य किये जा रहे हैं।
  • प्रधानमंत्री आदर्शग्राम योजना -

    प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत निर्मित आधारभूत संरचना
    यह योजना सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गया जिले के वैसे 225 गाँव जहाँ अनुसूचित जाति की आवादी 50 प्रतिशत से अधिक है, के सर्वांगीण विकास के लिए प्रारम्भ की गई है। केन्द्र सरकार द्वारा इस योजना के तहत प्रत्येक चयनित ग्राम में आधारभूत संरचना विकास एवं केन्द्र सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं के अन्तरपूर्ति घटक (Gap Filling Component) हेतु प्रति ग्राम 20.00 लाख रु0 की दर से कुल 4500.00 लाख रु0 तथा तकनिकी संसाधन सहयोग एवं सर्वेक्षण तथा इसके निमित्त कार्यशाला के आयोजन तथा अन्य आकस्मिक खर्च हेतु 22.50 लाख की राशि उपलब्ध करायी गई है। राज्य सरकार द्वारा समानुपातिक राशि उपलब्ध कराने के निर्णय के तहत 2272.50 लाख रु0 की स्वीकृति दी गई है। इस योजना के तहत गया जिला के 16 प्रखंडों में ग्राम सभा द्वारा 658 योजनाओं की स्वीकृति दी गई है, जिसकी प्राक्कलित राशि 2631.14 लाख रु0 तथा व्यय की गई राशि 518.21 लाख रु0 है तथा 38 योजनाओं को पूर्ण कर लिया गया है।
    वित्तीय वर्ष 2011-12 में केन्द्र सरकार द्वारा अन्तरपूर्ति घटक Gap Filling Component) हेतु प्रति ग्राम 10.00 लाख रु0 की दर से कुल 2250.00 लाख रु0 की अतिरिक्त राशि उपलब्ध करायी गई है। वित्तीय वर्ष 2012-13 में 200.00 लाख रू0 प्रावधान किया गया है।
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